दारू, जिसे शराब या एल्कोहल भी कहा जाता है, एक नशीला पदार्थ है जो इथेनॉल (C₂H₅OH) के रूप में जाना जाने वाला रासायनिक यौगिक से बनता है। यह मुख्य रूप से किण्वन (fermentation) या आसवन (distillation) की प्रक्रिया के माध्यम से फलों, अनाज, या शर्करा युक्त पदार्थों से तैयार किया जाता है। दारू के प्रकार: 1. बियर (Beer): यह सबसे हल्की शराब होती है, जो जौ या अन्य अनाज को किण्वित करके बनाई जाती है। इसमें एल्कोहल की मात्रा 4% से 6% तक होती है। 2. वाइन (Wine): अंगूर या अन्य फलों के रस को किण्वित करके बनाई जाती है। इसमें एल्कोहल की मात्रा 8% से 15% होती है। 3. व्हिस्की (Whisky): इसे अनाज को किण्वित और आसवन की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसमें एल्कोहल की मात्रा लगभग 40% होती है। 4. वोडका (Vodka): यह एक स्पष्ट और शुद्ध एल्कोहल युक्त पेय होता है, जिसे अनाज या आलू से आसवन करके तैयार किया जाता है। इसमें एल्कोहल की मात्रा 35% से 50% तक हो सकती है। 5. रम (Rum): यह गन्ने के रस या शीरे (molasses) से बनाया जाता है और इसमें एल्कोहल की मात्रा 40% से 50% तक हो सकती है। दारू की बनावट: दारू में मुख्य रूप से इथेनॉल होता है, जो कि नशा पैदा करने वाला प्रमुख घटक है। जब इथेनॉल को पीया जाता है, तो यह जल्दी से रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाता है और मस्तिष्क में पहुंचकर नशे की स्थिति पैदा करता है। दारू की प्रक्रिया: किण्वन (Fermentation): इसमें खमीर (yeast) शर्करा को एल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड में तोड़ देता है। आसवन (Distillation): यह प्रक्रिया किण्वित मिश्रण से एल्कोहल को अलग और शुद्ध करने के लिए की जाती है, ताकि एल्कोहल की मात्रा बढ़ाई जा सके। नशे का प्रभाव: दारू पीने से व्यक्ति के मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) पर प्रभाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है, और शरीर में शारीरिक और मानसिक नशे की स्थिति उत्पन्न होती है। दारू का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए तो यह सामाजिक रूप से स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

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